राजद में लालू की 10वीं पारी की पटकथा तैयार, आज करेंगे अध्‍यक्ष पद का नामांकन

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पटना ।

राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के अध्यक्ष पद पर लालू प्रसाद यादव के निर्विरोध निर्वाचन की पटकथा फिर तैयार कर ली गई है। तथ्य-कथ्य-शिल्प-शैली सब लालू के मुताबिक। पार्टी में यह उनकी लगातार 10वीं पारी होगी। वर्ष 1997 में जनता दल से अलग होकर राजद के गठन के बाद से ही लालू के मुकाबले मैदान में कोई नहीं आया।

बिहार में महागठबंधन के बिखरने के बाद नेता प्रतिपक्ष के रूप में जिस तरह से तेजस्वी यादव का तेज निखर कर सामने आया है, उससे कुछ दिन पहले तक माना जा रहा था कि पार्टी में भी उन्हें लालू के बाद कोई विशेष ओहदा दिया जाएगा। शीर्ष स्तर पर तेजस्वी के लिए कार्यकारी अध्यक्ष जैसी व्यवस्था बनाने पर मंथन भी किया जा रहा था, किंतु पार्टी के संविधान में ऐसा कोई प्रावधान नहीं होने के कारण विचार को रफ्तार नहीं मिल पाई। अब लालू की ताजपोशी के कुछ दिन बाद ऐसी कोशिश की जा सकती है।

बहरहाल, लालू को राजद की कमान फिर से सौंपने के लिए संगठनात्मक चुनाव की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। 21 नवंबर को राजद के राष्ट्रीय निर्वाचन पदाधिकारी जगदानंद सिंह पार्टी के खुले अधिवेशन के पहले लालू के निर्विरोध निर्वाचन की विधिवत घोषणा करेंगे, लेकिन इसके पहले पार्टी के संविधान के मुताबिक लालू को कई प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ेगा।

रविवार को आम उम्मीदवारों की तरह लालू राजद के प्रदेश कार्यालय पहुंचकर नामांकन करेंगे। राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए उनका एकमात्र नामांकन होगा। उसी दिन शाम पांच बजे तक स्क्रूटनी करके उन्हें एकमात्र उम्मीदवार भी घोषित कर दिया जाएगा। यह भी तय है कि अगले दिन सोमवार को जब नामांकन करने वाले प्रत्याशियों की सूची प्रकाशित होगी तो उसमें अकेला नाम लालू प्रसाद का ही दिखेगा। नियमों के मुताबिक उन्हें नाम वापसी का मौका भी दिया जाएगा। अगर उन्होंने खुद की दावेदारी वापस नहीं ली तो उसी दिन मान लिया जाएगा कि राष्ट्रीय अध्यक्ष की कमान फिर से लालू के हाथ में चली गई है।

पहली बार 1997 में बने थे अध्यक्ष
जनता दल से टूटकर लालू ने पांच जुलाई 1997 को राष्ट्रीय जनता दल की बुनियाद रखी थी। नई पार्टी के वह पहले राष्ट्रीय अध्यक्ष मनोनीत किए गए थे। इसके बाद पार्टी में संगठन चुनाव की परंपरा शुरू की गई। निचले स्तर पर यह अभी भी जारी है, किंतु शीर्ष स्तर पर सबकुछ निर्विरोध हो जाता है। लालू के नाम और काम के आगे पार्टी के दूसरे नेताओं के कद-पद छोटे पड़ जाते हैं।

चारा घोटाले में अक्टूबर 2013 में जेल जाने के बाद लगने लगा था कि राजद को नया नेतृत्व मिलने वाला है। राष्ट्रीय अध्यक्ष के दावेदारों में पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी समेत कुछ नेताओं के नाम उछाले गए थे, किंतु लालू का विकल्प बनना किसी के लिए आसान नहीं था। जाहिर है, लालू के कद-पद को चुनौती नहीं मिली और रांची सेंट्रल जेल से ही राजद की अध्यक्षता होती रही।

नामांकन की मुहूर्त 11.30 बजे
विपक्ष के तमाम आरोपों से घिरे लालू प्रसाद के नामांकन के लिए दोपहर 11.30 बजे की मुहूर्त निकाली गई है। राजद के नए राष्ट्रीय प्रवक्ता शंकर चरण त्रिपाठी ने ग्र्रह-नक्षत्रों की स्थिति देखने और शुभ घड़ी का आकलन करने के बाद ही यह मुहूर्त निकाली है। तय समय पर नामांकन के लिए लालू कुछ देर पहले ही राजद कार्यालय पहुंच जाएंगे।

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