UN की टिप्पणी पर भारत ने जताया कड़ा विरोध, कहा- अपनी शर्तों पर देंगे शरण

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जिनेवा।

संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार प्रमुख के उस बयान पर भारत ने तीखा विरोध जताया है, जिसमें उन्होंने रोहिंग्या मुसलमानों के साथ कश्मीर के हालात व पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या के मुद्दे पर भारत पर प्रतिकूल टिप्पणी की हैं।

संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजीव के चंदर ने कहा कि रोहिंग्या मुसलमानों को भारत अपनी शर्तों पर शरण देगा, क्योंकि ये लोग सुरक्षा व्यवस्था के लिए खतरा बन सकते हैं। कश्मीर में मानवाधिकारों के उल्लंघन के आरोप पर चंदर का कहना है कि संयुक्त राष्ट्र संघ को यह दिखाई नहीं दे रहा कि वहां आतंकवाद कौन-सा देश फैला रहा है।

चंदर का कहना है कि भारत में न्यायपालिका, प्रेस व सिविल सोसायटी को पूरी स्वतंत्रता हासिल है। दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश होने के नाते भारत मानवाधिकारों को लेकर पूरी तरह से सजग है। उनका कहना था कि ये टिप्पणी भारत की साख पर धब्बा लगा रही हैं। पीएम नरेंद्र मोदी का मूलमंत्र है सबका साथ सबका विकास। उनका कहना है कि घटना विशेष के आधार पर ये आकलन हुआ है। चंदर ने बताया कि उच्चायुक्त ने जो जानकारी दी है उसे लेकर भारत बेहद विचलित है, क्योंकि छोटी घटनाओं के आधार पर पूरे समाज की व्याख्या हुई है।

उल्लेखनीय है कि संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख जैड रा-अद अल हुसैन ने मानवाधिकार काउंसिल के 36वें सत्र में सोमवार को ये टिप्पणी की थीं। उन्होंने धार्मिक असहिष्णुता व मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को मिल रही धमकियों को लेकर भी भारत की तीखी आलोचना की।

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