राज्य करेंगे प्रतिस्पर्धा, लाभ उठाएंगे छात्र; मानव संसाधन मंत्रालय देगा इसे आकार

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 नईदिल्ली। 

राज्यों के लिए ब्रैंडिंग का नया मौका आने वाला है। शिक्षा के क्षेत्र में अच्छा करने वाले राज्यों को राष्ट्रीय तौर पर सराहा ही नहीं जाएगा बल्कि दूसरे राज्यों को भी उसका अनुसरण करने का संदेश दिया जाएगा। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय राज्यों के उस नवाचार की जानकारी जुटा रहा है जो दूसरे राज्यों के लिए भी प्रेरणादायी बन सके।

मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने हाल ही में राज्यों के साथ अपने इस विचार को साझा भी किया है। अब तक जिन राज्यों ने शिक्षा के क्षेत्र में अपने यहां होने वाले अच्छे कामों को ब्यौरा मंत्रालय को भेजा है, उनमें महाराष्ट्र, तमिलनाडु, छत्तीसगढ़, राजस्थान और मध्य प्रदेश शामिल है। वही मंत्रालय अब इन सभी राज्यों द्वारा किए जा रहे इन अच्छे कामों ( गुड प्रेक्टिस) को बाकी राज्यों को भेजेगा। मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी की मानें, तो अभी यह कहना मुश्किल है, कि एक राज्य द्वारा शिक्षा में सुधार को लेकर उठाए गए कदम दूसरे राज्यों के लिए मुफीद ही होंगे। लेकिन इससे राज्यों के बीच शिक्षा में सुधार को लेकर प्रतिस्पर्धा जरुर बढ़ेगी।

राज्यों के कुछ अनूठे कदम

महाराष्ट्र – लर्निग आउट कम यानी किस क्लास के बच्चे को क्या-क्या आना चाहिए। केंद्र सरकार द्वारा तैयार किए गए इस मानक को महाराष्ट्र की सरकार ने अब अपने यहां पढ़ाई जाने वाली किताबों के अंत में छापने का फैसला लिया है। कुछ जगहों में इसकी शुरुआत भी कर दी गई है। मकसद साफ है कि बच्चे जब किताब पूरी खत्म करें, तो इस आउट कम को देखें और अपना मूल्याकंन खुद करें। साथ ही अभिभावक भी इसे देखें।

छत्तीसगढ़ – बच्चों को भारी बस्ते से बोझ से मुक्ति दिलाई गई है। यहां स्कूलों में ही पुरानी किताबों का बैंक तैयार किया गया है, जहां बच्चों को उन्ही किताबों से पढ़ाया जाता है। इस दौरान नोटबुक भी स्कूल में रहती है। बच्चे स्कूल सिर्फ लंच बाक्स और डायरी लेकर आते है। सीधे कहें, तो बैगलेस स्कूल की ओर कदम उठाया गया है।

तमिलनाडु- स्कूलों में पढ़ाए जाने वाले तमाम विषयों की मोटी व भारी किताबों को छोटी-छोटी किताबों में बदला गया है। जो सेमेस्टर के हिसाब से स्कूलों में पढाई जाती है। इसके चलते बच्चों को भारी-भरकम किताबों को ढोने से निजात मिली है। साथ ही उन्हें इन किताबों में पढ़ने मे बच्चों को आसानी होती है।

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