बंजर जमीन को बनाया हरा-भरा, हर साल इतने पेड़ लगाने का संकल्प

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नाहन ।

स्कूल में दी गई सामाजिक सरोकारों की सीख को हर बच्चा उतनी गंभीरता से नहीं लेता है, लेकिन जो उस सीख को आत्मसात कर लेता है, वह जयचंद बन जाता है। करीब चार साल पहले यहां के राजकीय हाईस्कूल चोकर में पर्यावरण विषय की जानकारी इस छात्र के दिलो-दिमाग में ऐसे घर कर गई कि उसने इसे दिनचर्या का अनिवार्य अंग बना लिया।

बात 2013 की है। स्कूल की प्रार्थना सभा में शिक्षकों ने पर्यावरण को हो रहे नुकसान और उससे बचने के उपायों पर बच्चों को जानकारी दी। सातवीं कक्षा में पढ़ रहा जयचंद गंभीरता से बात सुनता रहा, लेकिन कुछ शंकाएं उसके मन में थीं। इनको दूर करने के लिए वह शिक्षकों के पास पहुंचा। अच्छा यह हुआ कि शिक्षकों ने चिढ़ने की बजाय उसकी हर शंका का समाधान सहजता से किया। शंकाएं दूर होते ही जयचंद में एक पर्यावरणप्रेमी का जन्म हो चुका था। उसने ठान लिया कि वह पर्यावरण को बचाने के लिए हर साल कम से कम 40 पौधे रोपेगा और उनका संरक्षण भी करेगा।

शुरुआत की अपने गांव भांगडी से। पहले साल गांव की बंजर जमीन पर 40 पौधे रोपे। अब तक पांच साल में जयचंद 200 से अधिक पौधे लगा चुका है। खुशी की बात यह है कि उसकी देखभाल के कारण पौधों की पुष्पित-पल्लवित होने की दर 95 फीसद से अधिक है। 17 साल के किशोर का यह प्रयास न केवल पर्यावरण संरक्षण में मददगार साबित हो रहा है, बल्कि समाज को सीख भी दे रहा है कि जज्बा व जुनून हो तो कुछ भी हासिल किया जा सकता है।

ये पौधे रोपे
जयचंद ने सड़क के किनारे व जंगल के साथ लगती जमीन पर नाशपती,अखरोट, आडू, सेब, देवदार व कायल के पौधे रोपे हैं। सुखद परिवर्तन यह देखने को मिला है कि ग्रामीण पौधे मुहैया करवाने और रोपने में उसका सहयोग करने लगे हैं। जयचंद के पिता राम लाल व माता रक्षा देवी ने बताया कि पर्यावरण के प्रति जयचंद के लगाव को देखते हुए वे हर साल उद्यान विभाग नौहराधार से पौधे उपलब्ध करा रहे है।

कम उम्र में सम्मान
पर्यावरण संरक्षण के लिए जयचंद को हाल ही में राज्यस्तरीय पुरस्कार से नवाजा गया है। 11वीं में पढ़ने वाला 16 वर्षीय जयचंद पर्यावरण संरक्षण के लिए यह पुरस्कार प्राप्त करने वाला सबसे कम आयु का छात्र है।

200 से अधिक पौधे लगा चुका जयचंद अब तक पांच साल में
17 साल के किशोर का प्रयास पर्यावरण संरक्षण के साथ साथ समाज को सीख भी दे रहा है

पौधरोपण से हरियाली के साथ पर्यावरण सुरक्षित रहेगा और जब ये फलदार पौधे बड़े होंगे तो लोगों की आजीविका के साधन भी बनेंगे। -जयचंद

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