स्वच्छता मिशन को ठेंगा दिखा रहा कचहरी स्टेशन

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सिवान।

कचहरी स्टेशन का हाल बेहाल है। इसके लिए रेलवे तो जिम्मेदार है ही, आसपास के लोग भी बराबर के भागीदार हैं।

यहां पर बना एक मात्र प्लेटफॉर्म सूर्योदय के पूर्व सुबह और अंधेरा होने के बाद शाम में लोगों के लिए शौचालय के काम आ रहा है। गंदगी के कारण यहां से ज्यादातर लोग थावे जाने के लिए यहां के बजाए सिवान जंक्शन से ही ट्रेन पकड़ना मुनासिब समझते हैं। कई बार यहां के लोगों को रेलवे प्रशासन द्वारा कई बार समझाया गया है लेकिन लोग मानते ही नहीं। कड़ाई होती नहीं।

इस स्टेशन पर यात्रियों के लिए शौचालय की उचित व्यवस्था नहीं है। अनदेखी के कारण ही यहां बनाया गया शौचालय खंडहर में तब्दील हो चुका है और साफ सफाई नहीं होने के कारण यहां जंगल झाड़ उग आए हैं। हैरानी की बात तो यह है कि यहां अभी भी सिर्फ बिजली के सहारे अंधेरा दूर किया जाता है। अगर बिजली कट गई तो रेलवे की वैकल्पिक व्यवस्था कुछ भी नहीं है। इस कारण यहां रात में लोगों को अंधेरे में ही आना-जाना करना पड़ता है। जबकि इस स्टेशन से अब ट्रेनें गोरखपुर से होते हुए जालंधर और नई दिल्ली के लिए भी आती-जाती हैं। और तो और. आज तक जीआरपी और आरपीएफ पोस्ट या उसके जवान नियुक्त नहीं किए गए, जो रात्रि में यात्रियों को ट्रेन से उतरने के बाद सुरक्षा दे सकें। बताते चलें कि यहां से प्रतिदिन लगभग एक हजार यात्रियों का आना-जाना होता है।

कहते हैं अधिकारी

स्टेशन को ठीकेदार के सिपुर्द कर दिया गया है। उसके कार्य की जांच पड़ताल का जिम्मा डीसीआइ गणेश यादव के पास है। समय-समय पर वहां साफ सफाई का जायजा लिया जाता है लेकिन स्थानीय लोगों द्वारा पटरी पर मल त्याग करने के कारण स्थिति दयनीय है। इसके लिए स्वयं इच्छाशक्ति होनी चाहिए और इसके लिए लोगों को जागरूक होना पड़ेगा ।

– सुरेश गिरि, स्टेशन अधीक्षक, सिवान जंक्शन

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