बिहार में गहराने लगा बाढ़ का संकट, आधा दर्जन की डूबकर मौत

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पटना ।

बिहार की अधिकांश नदियों के जलस्तर में वृद्धि जारी है। भयंकर बाढ़ की आशंका से ग्रामीण सहमे हुए हैं। कोसी के जलस्तर में उतार-चढ़ाव जारी है। उधर, महानंदा नदी जिन जगहों पर तेजी से बढ़ रही थी वहां जलस्तर कमी दर्ज की गई। गंगा, कोसी, बरंडी सहित अन्य नदियों के जलस्तर में वृद्धि जारी है।

महानंदा का जलस्तर खतरे के निशान से नीचे चेतावनी स्तर के करीब पहुंच गया है। इस कारण कई स्थानों पर महानंदा के कटाव का खतरा मंडराने लगा है। मोतिहारी में पिछले चौबीस घंटे के दौरान तालाब और पानी भरे गड्ढे में डूबने से पांच बच्चों की मौत हो गई। भागलपुर के सबौर में गंगा में डूबने से एक बालक की मौत हो गई।

सिवान में सरयू नदी के जलस्तर में गुरुवार की अपेक्षा धीमी गति से जलस्तर बढ़ा। बक्सर में कटाव रोकने के लिए बांध सुदृढ़ीकरण के लिए रखीं बालू की बोरियां पहली बारिश में ही गंगा में समा गईं। कोसी तटबंध के अंदर बसे सरायगढ़-भपटियाही, किसनपुर व मरौना प्रखंड क्षेत्र के गांवों में पानी से परेशानी बनी हुई है।

कटिहार में तटबंध के बाहर बुधवार को महिषी प्रखंड के हरिशंकरी नहर टूट जाने से आधा दर्जन गांव में पानी घुस गया है। इस इलाके में धान की फसल डूब गयी है।

उत्तर बिहार में शुक्रवार को नदियां खतरे के निशान से नीचे रहीं। धूप खिली रही। मधुबनी व दरभंगा जिले के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में स्थिति यथावत है। जलजमाव से कई क्षेत्रों में लोग जूझ रहे हैं। पानी घटने के बाद नदियों के आसपास के क्षेत्रों में कटाव जारी है। पश्चिम चंपारण जिले में गंडक के जलस्तर में कमी आई है। फिर भी पानी का दबाव है।

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