ओम नम: शिवाय- ठेपहां का गौरीशंकर मंदिर

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धरती से निकले है गौरीशंकर बाबा, लिंग में ही शिव पार्वती की तस्वीर भी

प्राचीन है इतिहास

जीरादेई प्रखंड क्षेत्र का ठेपहा गांव अति प्राचीन है, जहां स्वत: शिवलिंग निकला है। इसमें भगवन शिव व मां पार्वती की तस्वीर भी है, यही कारण है कि इस मंदिर का नाम गौरीशंकर बाबा पड़ा। यहां दूरदराज से लोग सावन के महीने में जल चढ़ाने आते हैं तथा जिसकी मन्नत पूरी होती है, वे यहां हरिकीर्तन भी कराते हैं ।

इतिहास

इस मंदिर का बहुत प्राचीन इतिहास है। जब चारो तरफ जंगल ही जंगल था , उस समय बरगद के पेड़ के नीचे जमीन से शिवलिंग निकला। उसे चरवाहों ने देखा और इसकी चर्चा चारो तरफ होने लगी तो लोगों का हुजूम जुटने लगा। ग्रामीणों ने मिलकर बाद में वहां छोटे से मंदिर का निर्माण कराया। बरगद के वृक्ष ने इस मंदिर को ऐसे घेरा है, मानो छतरी हो। इतिहास के जानकार आचार्य विजेंद्र पाठक ने बताया कि ठेपहा गांव का इतिहास बहुत प्राचीन है। ठेग्ना से ठेपहा बना है । ठेग्ना का अर्थ होता है विश्राम के लिए सिर के बोझ को ठेकना । वैसे ठेपहा का भी अर्थ होता है पांव ठहर जाना या रुक जाना। यह हिरण्यवती यानी सोना नदी के पश्चिमी किनारे बसा हुआ है।

बोले ग्रामीण

बाबा की असीम महिमा है। भक्ति के निष्ठा के साथ जो मांगते हैं, मिल जाता है । – रामाश्रय सिंह

हमलोग भी मंदिर की पूजा में शामिल होते हैं और इनकी महिमा का बखान हमारे दादा भी किया करते थे । -जाहिद अंसारी

हमारे परिवार का पालन पोषण बाबा की कृपा से होता है। हम लोग इनके अनन्य भक्त हैं। – मुंशी साह

सावन माह के बाद भी हम लोग बाबा की पूजा-अर्चना करते हैं। सावन में यहां दर्शन करने के लिए आने वाले श्रद्धालुओं की सेवा भी ग्रामीण करते हैं। – भानु प्रताप

बोले पुजारी

इस मंदिर में एक बार आकर जो गौरीशंकर का दर्शन करता है, वह बार-बार आता है। यहां सच्चे मन से मांगी गई हर मन्नत पूरी होती है। -रघुनाथ गिरी

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