स्मॉग: जहरीली हवा को कैसे मात दें, इनसे सीखें तरीके

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नई दिल्ली । 

दिल्ली-एनसीआर में छाई प्रदूषण की धुंध गहराती जा रही है। पीएम 2.5 और पीएम 10 प्रदूषक तत्व खतरनाक स्तर पर पहुंच गए हैं। लोगों का घरों से बाहर निकलना भी दूभर हो चुका है। चिंता का सबसे बड़ा विषय यह है कि हमारे पास इससे निपटने का कोई कारगर उपाय नहीं है। ऐसे में दुनिया के कुछ देशों और शहरों से हमें सीखने की जरूरत है, जिन्होंने प्रदूषण के खिलाफ प्रभावी उपाय किए। आज बीजिंग, मिलान, लंदन, पेंसिलवेनिया और पेरिस में पहले के मुकाबले हालात काफी बेहतर हैं। उनके तरीकों को आजमाकर हम भी प्रदूषण की धुंध से निपट सकते हैं और भविष्य के लिए सचेत भी रह सकते हैं।

मिलान, इटली

दिसंबर 2015 में मिलान में अधिक प्रदूषण रहा। सरकार ने हफ्ते के चार दिन सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक निजी गाड़ियों को प्रतिबंधित कर दिया। इटली के अन्य शहर रोम में वाहनों के लिए सम-विषम फार्मूला लागू किया गया। साइकिल को बढ़ावा दिया गया।

बीजिंग, चीन

नवंबर, 2015 को बीजिंग की हवा सामान्य से 30 गुना अधिक जहरीली हो गई थी। वायु प्रदूषण 200 अंक तो कुछ इलाकों में यह 900 से ऊपर पहुंच गया। दिसंबर, 2015 में चीन ने पहली बार रेड अलर्ट जारी करके स्कूल बंद कराए, उद्योगों, निर्माण कार्यों और वाहनों पर प्रतिबंध लगाया। एक जनवरी, 2015 को पर्यावरण सुरक्षा कानून अमल में आया। इसके तहत प्रदूषण फैलाने वाले पर जुर्माना राशि कई गुना बढ़ा दी गई। 1500 से अधिक स्थानों पर एयर रिपोर्टिंग सिस्टम लगाकर हर घंटे हवा में प्रदूषण का स्तर मापकर उसे ऑनलाइन जारी किया जाता है। लोग साइकिल या सार्वजनिक यातायात को बढ़ावा दे रहे हैं। चीन लगातार कोयले के कम इस्तेमाल और सौर ऊर्जा को बढ़ावा दे रहा है। 2005 से पहले निर्मित वाहनों को सड़क से हटाने का भी निर्णय लिया गया। चीन में दुनिया का सबसे बड़ा एयरप्यूरीफायर लगाया गया है। बीजिंग में मिस्ट कैनन नामक प्रणाली से वातावरण में पानी की बौछारें छोड़कर प्रदूषण कम किया गया।

पेरिस, फ्रांस

मार्च, 2015 में पेरिस में प्रदूषण का स्तर अत्यधिक बढ़ गया था। पेरिस और उससे सटे 22 क्षेत्रों में वाहनों के लिए सम-विषम नियम लागू किया गया। इससे सड़कों पर आधी गाड़ियां कम हो गईं। प्रदूषण भी घटा। नियम तोड़ने वालों को पकड़ने के लिए बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी सड़कों पर उतारे गए। साइकिलों को बढ़ावा दिया गया।

लंदन, ब्रिटेन

1952 में पांच दिनों तक प्रदूषण वाली जहरीली हवाएं चलती रही। इसके चलते तकरीबन 4000 लोगों की जान गई। 1956 में क्लीन एयर एक्ट लागू किया गया, जिसके तहत उद्योगों और वाहनों से काले धुएं के उत्सर्जन पर प्रतिबंध लगाया गया।

पेंसिलवेनिया, अमेरिका

1948 में 20 लोगों की मौत प्रदूषित हवाओं से हुई। छह हजार से अधिक लोग बीमार हुए। 1970 में वहां एनवायरमेंटल बिल ऑफ राइट्स लागू किया गया। जिसके तहत प्रदूषण फैलाने वाले कारकों पर लगाम लगाई गई। लोगों को प्रदूषण से लड़ने के अधिकार दिए गए।

हानिकारक गैंसों और सूक्ष्म तत्वों की परत है स्मॉग

धूल, कोहरे और हवा में मौजूद नाइट्रोजन ऑक्साइड्स, सल्फर डाइऑक्साइड, कार्बन डाइऑक्साइड और पीएम10 जैसे हानिकारक प्रदूषक तत्व जब सूर्य की किरणों से मिलते हैं तो निचले वातावरण में ओजोन जैसी परत बना लेते हैं। इसे ही स्मॉग कहते हैं। ऊपरी वातावरण में मौजूद ओजोन हमें हानिकारक अल्ट्रावायलेट किरणों से बचाती है। लेकिन निचले वातावरण में इसके बनने से यह स्वास्थ्य के लिए हानिकारक बन जाती है। स्मॉग अपने स्रोत स्थान से दूर के स्थानों पर अधिक हानिकारक होता है। क्योंकि हवा के साथ दूसरे स्थान पर जाने के दौरान यह वातावरण में मौजूद हानिकारक रसायनों से प्रतिक्रिया करता है।

ऐसे उत्पन्न होता है स्मॉग

स्मॉग बड़ी मात्रा में कोयला जलाने पर, पराली जलाने पर, और मुख्यत: वाहनों से निकलने वाले धुएं, ऊर्जा संयंत्रों से निकलने वाले धुएं व आतिशबाजी से निकलने वाले धुएं में मौजूद वायु प्रदूषक तत्वों से उत्पन्न होता है।

1905 में मिला नाम

20वीं सदी के पहले दशक की शुरुआत में लंदन के ऊपर छाई धुएं और कोहरे की चादर के अध्ययन पर जुलाई 1905 में डॉक्टर हेनरी एंटोनी ने अपने शोध में स्मॉग शब्द का पहली बार उल्लेख किया था। यह दो शब्दों स्मोक यानी धुआं और फॉग यानी कोहरे से मिलकर बना है।

मास्क लगाकर रखें, भीड़भाड़ से दूर रहें। एहतियाती कदम – विटामिन सी युक्त भोजन का सेवन करें। ’ अति आवश्यक काम होने पर ही घर से बाहर निकलें…

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