एक थप्पड़ मारने की मिली एेसी सजा, आरोपी ने कहा-हुजूर अब तो सजा सुना दीजिए

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पटना ।

भागलपुर कोर्ट में साेमवार को 27 साल पुराने मामले की जब सुनवाई शुरू हुई तो माहौल गमगीन हो गया जब 76 वर्षीय अबू बकर अपने  फैसले को लेकर एसीजेएम-14 की कोर्ट में पहुंचा। उस पर साधारण मारपीट का मुकदमा है। कटघरे में पहुंचते ही फरियादी अबु बकर ने कहा- हुजूर, 76 साल का हूं, पांव कब्र में है, अब तो फैसला सुना दीजिए। 27 साल से कोर्ट-कचहरी करते-करते बाल सफेद हो चुके हैं।

2 जून, 1993 को पड़ोसी को मारा था थप्पड़

अबु बकर की दलील पर जब एसीजेएम आरके मिश्रा ने तारीखों से मोटी हो चुकी फाइल के अंतिम कागजातों को पढ़ना शुरू किया तो वे भी बुदबुदा पड़े… हद हो गई। अबु बकर की ओर से सीनियर वकील कामेश्वर पांडेय और उमेश पांडेय ने कोर्ट बताया कि 2 जून 1993 को पिथना गांव में खेत में काम करने के सवाल पर पड़ोसी मोहम्मद एेनुल हक ने झगड़े के बाद थप्पड़ मारने के आरोप का मुकदमा दर्ज करा दिया।

 

एपीओ को आदेश, पुराने मामलों की जल्द कराएं गवाही

अबु बकर के वकील की दलील पर कोर्ट ने माना कि मुकदमे में इतनी देरी ठीक नहीं। इससे तो आम लोगों को न्याय पर भरोसा उठ जाएगा। तारीख पर तारीख लेकर मुकदमों को लंबा खींचने का वक्त चला गया। वकीलों को भी इस पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने सहायक अभियोजन पदाधिकारी को भी कहा कि पुराने मामले में जल्दी गवाही के लिए त्वरित कार्रवाई करें। संबंधितों को नोटिस-समन भेजकर बुलाया जाए।

 

क्या है भादवि की धारा 143

जो कोई विधि विरुद्ध जमावड़े का सदस्य होगा, उसपर आरोप साबित होने के बाद छह माह की सजा या जुर्माना या दोनों से दंडित किया जाएगा।

क्या है भादवि की धारा 323

जो व्यक्ति जान बूझकर किसी दूसरे व्यक्ति या व्यक्तियों को मामूली रूप से चोट पहुंचाता है। आरोप साबित होने पर एक साल तक की कैद या एक हजार रुपये बतौर जुर्माना या दोनों से दंडित किया जायेगा।

बड़ा सवाल

1. एफआईआर के समय ही पुलिस ने क्यों नहीं दोनों पक्षों को सुलह का मौका दिया?

2. कोर्ट में तारीख पर तारीख से फाइल तो मोटी हो गई, लेकिन किसी ने लोक अदालत में इसे भेजने की कोशिश क्यों नहीं की?

3. सरकारी पक्ष ने गवाही के लिए क्यों नहीं संबंधितों के खिलाफ नोटिस व समन का सहारा लिया?

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